भगवान शिव की आराधना और मनोकामनाओं की पूर्ति से जुड़ा मंशा महादेव व्रत इस वर्ष 16 अगस्त से आरंभ होगा। राजगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करते हैं। यह केवल उपवास का पर्व नहीं,बल्कि कई महीनों तक चलने वाली शिव आराधना, संयम और साधना की परंपरा है।
मंशा महादेव व्रत की शुरुआत श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से मानी जाती है और इसका समापन कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को होता है। इस अवधि में आने वाले प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और व्रतधारी कथा का श्रवण करते हैं।
राजगढ़ स्थित पांच धाम एक मुकाम माताजी मंदिर सहित क्षेत्र के अनेक शिवालयों में श्रद्धालु इस व्रत का संकल्प लेते हैं। माताजी मंदिर से संकल्प लेकर मध्यप्रदेश के अलग-अलग नगरों के साथ देश के अन्य राज्यों में भी श्रद्धालु इस परंपरा को निभाते हैं। विदेशों में रहने वाले भारतीय श्रद्धालु भी मोबाइल के माध्यम से संकल्प लेकर मंशा महादेव व्रत करते हैं।
मंशा महादेव व्रत में श्रद्धा के साथ नियमों का पालन भी महत्वपूर्ण माना गया है। व्रत की अवधि में व्रतधारी एक समय भोजन करते हैं और सात्विक जीवनशैली अपनाने का प्रयास करते हैं। परंपरा के अनुसार प्याज, लहसुन, गाजर, मूली, बैंगन, मदिरा तथा दूसरे व्यक्ति की जूठन का त्याग किया जाता है। दूसरे के वस्त्रों का उपयोग न करना, पृथ्वी या काष्ठ पर शयन करना, किसी की निंदा न करना, किसी प्राणी को कष्ट न पहुंचाना, असत्य से दूर रहना और इंद्रियों पर संयम रखना भी व्रत के नियमों में बताया गया है।
व्रत के दौरान गुरु, माता-पिता,अतिथि और अपने से बड़े लोगों का सम्मान करने की परंपरा है। मान्यता है कि श्रद्धा और बताए गए नियमों के साथ मंशा महादेव व्रत करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन के कष्ट दूर होकर सुख और शांति की प्राप्ति होती है।
व्रत शुरू होने से पहले श्रद्धालु आवश्यक पूजन सामग्री एकत्र करने में जुटे हैं।
मंशा महादेव व्रत के लिए आवश्यक 29 सामग्री
मंशा महादेव व्रत की पूजा के लिए परंपरा के अनुसार कंकु, अबीर, गुलाल, हल्दी, मेहंदी, चावल, कपूर, लच्छा, अगरबत्ती, छोटी सुपारी 1, बड़ी सुपारी 2, चंदर पाउडर, जनेऊ का जोड़ा 2, नारियल 1, खारक 2, बादाम 2, फूलमाला, खुले फूल, बिल्व पत्र, द्रोप, लगा हुआ पान, पंचामृत, फल, भांग, लौंग-इलायची, मिश्री-चिरौंजी, घी की बत्ती, नंदी सिक्का और 4 ग्रंथी वाला डोरा शामिल है।
उद्यापन के लिए भी सामग्री की आवश्यकता होती है
मंशा महादेव व्रत पूर्ण होने के बाद होने वाले उद्यापन के लिए परंपरा के अनुसार आटा 2 किलोग्राम, घी 625 ग्राम और गुड़ 500 ग्राम की आवश्यकता बताई गई है।
चार माह तक चलने वाली यह शिव आराधना श्रद्धालुओं के लिए आस्था, संयम और भक्ति का विशेष अवसर मानी जाती है। 16 अगस्त से शुरू होने वाले मंशा महादेव व्रत को लेकर राजगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालु तैयारियों में जुट गए हैं।
मंशा महादेव व्रत की मान्यता
मंशा महादेव व्रत को भगवान शिव की विशेष आराधना से जुड़ा व्रत माना जाता है। श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और परिवार की सुख-शांति की कामना से इस व्रत का संकल्प लेते हैं। इस दौरान पूजा, कथा श्रवण, सात्विक आहार और संयमित जीवन को विशेष महत्व दिया जाता है।
16 अगस्त विशेष: मंशा महादेव व्रत केवल पूजा और उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कई महीनों तक श्रद्धा, अनुशासन और भगवान शिव के प्रति समर्पण की साधना के रूप में निभाया जाता है।


